Shamli unn: रमजान के पाक महीने की 29वीं रात जनपद शामली के कस्बा ऊन के लिए बहुत ही बरकत और सुकून भरी रही। यहाँ के मदरसा इमदादुल इस्लाम की इमदादिया मस्जिद में कुरान-ए-करीम पूरा होने की खुशी में एक रूहानी प्रोग्राम रखा गया। इस मुबारक मौके पर न केवल कस्बे के लोग, बल्कि पास के गांवों जैसे बझेड़ी, ढिंढाली और पिंडोरा से भी बड़ी संख्या में लोग अपनी दुआएं लेकर पहुंचे।
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Shamli Unn: मोहब्बत का पैगाम और अमन की दुआ
इस महफिल में मुख्य अतिथि के तौर पर हजरत मौलाना मोहम्मद वासिल साहब अल हुसैनी तशरीफ लाए। उन्होंने बहुत ही आसान और मीठी भाषा में लोगों को समझाया कि इस्लाम का असली संदेश आपस में प्यार और भाईचारा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हम सबको मिल-जुलकर रहना चाहिए और एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़ा होना चाहिए।
प्रोग्राम के आखिर में मौलाना साहब ने पूरे देश की तरक्की और दुनिया भर में शांति के लिए बहुत ही भावुक दुआ मांगी। मस्जिद में मौजूद हर शख्स की जुबां पर 'आमीन' था और हर कोई बस यही चाहता था कि हमारे मुल्क में हमेशा प्यार और एकता बनी रहे।
हाफिजों की मेहनत और समाज का प्यार
पूरे रमजान के दौरान अपनी प्यारी आवाज में कुरान सुनाने वाले हाफिज मोहम्मद तौसीफ और हाफिज मोहम्मद हैदर की लोगों ने बहुत तारीफ की। समाज के लोगों ने अपनी खुशी से इन हाफिजों को तोहफे देकर उनका हौसला बढ़ाया।
इसी दौरान मास्टर नसीबुद्दीन साहब ने अपनी तरफ से दोनों हाफिजों को एक-एक खूबसूरत कलाई घड़ी इनाम में दी। साथ ही हाफिज मोहम्मद तौसीफ साहब को एक ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। यह मंजर देखकर वहां मौजूद बच्चों और युवाओं में भी पढ़ाई के प्रति एक नया जोश देखने को मिला।
प्रोग्राम में मौजूद खास शख्सियतें
मजलिस की रौनक बढ़ाने के लिए इलाके के कई बड़े उलेमा-ए-किराम मौजूद रहे, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
- मौलाना मोहम्मद अब्बास साहब (इमाम, जामा मस्जिद)
- हाफिज मोहम्मद इश्तियाक साहब (इमाम, छोटी मस्जिद)
- हाफिज मोहम्मद असरार साहब (पिंडोरा)
- हाफिज अली शेर साहब (पिंडोरा)
भाईचारे की एक जीती-जागती मिसाल
कस्बा ऊन का यह कार्यक्रम सिर्फ एक मजहबी जलसा नहीं था, बल्कि यह पूरे शामली जिले के लिए भाईचारे की एक मिसाल बन गया। यहाँ जिस तरह से लोगों ने मिलकर देश की शांति के लिए हाथ उठाए, वह दिखाता है कि हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
रिपोर्ट: दिल्ली क्राइम प्रेस न्यूज़ (महबूब मिर्ज़ा)

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